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Patrika 2020-04-29

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छिंदवाड़ा. ‘डांस’ शब्द सुनकर ही चेहरा खिल उठता है और हो भी क्यों न। यह एक ऐसी विधा है जो तन, मन को प्रसन्न कर देती है। बदलते समय के साथ भले ही डांस करने का तरीका बदल गया हो, लेकिन उद्देश्य एक ही है। वर्तमान में कथकली, भरतनाट्यम, कथक जैसे शास्त्रीय नृत्य के साथ ही वेस्टर्न डांस का क्रेज बढ़ रहा है।

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