सोयाबीन के बीज की किल्लत

Patrika 2020-06-09

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किसानों को नहीं मिल रहा उन्नत बीज
उड़द या मक्का की बुवाई करें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की एडवाइजरी

पहले अतिवृष्टि फिर टिड्डी संकट उसके बाद लॉकडाउन, इन सबसे किसान पहले ही परेशान थे लेकिन अब उनके सामने नया संकट खड़ा हो गया है। इस बार परेशानी खड़ी हुई है उन किसानों के सामने जो सोयाबीन की खेती करते हैं। उन्हें आसानी से बीज नहीं मिल रहा है। एेसे में कृषि विभाग ने भी एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें मक्का और उड़द की बुवाई करने की सलाह दी है साथ ही यह भी कहा है कि यदि किसान सोयाबीन की बुवाई करते हैं तो बीज की बुवाई रेज्ड बेड पद्धति से करें।
नहीं मिल रहे उच्च क्वॉलिटी के बीज
आपको बता दें कि प्रदेश में कोटा संभाग में सोयाबीन का उत्पादन अधिक किया जाता है। बेमौसम बारिश पहले ही किसानों पर आफत बन कर बरसी थी। एेसे में जब सोयाबीन को खलिहान, मंडी पहुंचाने का समय आया किसान मेड़ पर खड़े होकर खेतों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे थे। बेमौसम और अधिक बारिश के कारण खेतों में सोयाबीन खराब हो गई। सड़क किनारे खेतों वाले किसानों ने थ्रेशर को सड़क पर रखकर सोयाबीन निकाली। उपज वाली ट्रे से सोयाबीन के साथ आधी मिट्‌टी भी निकली। ऐसी सोयाबीन से मिट्‌टी को निकालना आसान नहीं था। उसका असर बीज पर पड़ा। अब किसान उन्नत क्वॉलिटी के बीज के लिए भटक रहे हैं।
मक्का उड़द की फसल की सलाह
स्थानीय कृषि विभाग ने बीज की कमी को देखते हुए किसानों को सलाह दी है कि वह फसल विविधिकरण की ओर बढ़ते हुए सोयाबीन के स्थान पर मक्का और उड़द की बुवाई कर सकते हैं। किसान इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए नजदीकी किसान सेवा केंद्र या कृषि से संबंधित कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके साथ ही विभाग ने यह भी कहा है कि यदि किसान सोयाबीन का उत्पादन ही करना चाहते हैं तो वह उनके पास रखे सोयाबीन बीज की साफ सफाई कर छोटे और क्षतिग्रस्त दानों को अलग निकाल लें और बीजोपचार के बाद उसे बुवाई के लिए उपयोग में लें। कृषि विभाग का कहना है कि सोयाबीन एक स्वपरागित फसल है। इसके प्रमाणित बीज द्वारा उत्पादन लेने के बाद उत्पादित बीज से किसानों अगले दो से तीन साल तक नई फसल की बुवाई कर सकता है।
पड़ोसी राज्य भी प्रभावित
आपको बता दें कि प्रदेश में न केवल कोटा संभाग बल्कि पड़ोसी राज्य जहां सोयाबीन का उत्पादन किया जाता है वहां भी कमोबेश यही स्थिति है। सोयाबीन उत्पादक राज्यों जैसे मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में भी सोयाबीन फसल के पकाव और कटाई के समय वर्षा होने के कारण सोयाबीन फसल का बीज उत्पादन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। एेसे में वहां से भी प्रदेश के किसान सोयाबीन के उन्नत बीजों की व्यवस्था नहीं कर पा रहे।

चौड़ी क्यारी पद्धति से करें बुवाई
कृषि विभाग ने किसानों का यह भी जानकारी दी है कि यदि वह उनके पास बचे हुए बीजों से बुवाई करना चाहते हैं तो बीज का अंकुरण करीब ७० प्रतिशत आने पर ही बुवाई के लिए प्रयोग करें। बीजों को अच्छी तरीके से साफ सफाई कर लें ताकि उसमें कंकड़ पत्थर या छोटे अथवा टूटे हुए बीज ना हों। इधर, बीजों की बुवाई से पहले उनका उपचार करना जरूरी होता है ताकि उनमें लगने वाले रोग व कीटों से फसल को बचाया जा सके। साथ ही सोयाबीन की बुवाई चौड़ी क्यारी पद्धति से ही करें ताकि अतिवर्षा के दौरान उत्पादन प्रभावित ना हो।

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