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Patrika 2020-06-14

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राजसमंद. ये जानकारी बहुत ही दर्दनाक है कि देश में सड़क हादसों में रोजाना हजारों लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से आधे लोग तो सिर्फ इसलिए मौत के मुंह में समा रहे हैं, क्योंकि उन्हें समय पर उनके ग्रुप का रक्त नहीं मिल पाता। कुछ ऐसे ही हालात पूरी दुनिया के हैं। केवल सड़क हादसे ही नहीं, ऐसी कई बीमारियां भी हैं, जिनमें बार-बार रक्त की जरूरत पड़ती है और अधिकतर बार मरीजों के परिजन संबंधित ग्रुप का रक्त नहीं जुटा पाते। नतीजतन मरीज की मौत हो जाती है। ऐसे में जीवन बचाने के लिए रक्तदान करने वाले लोग जरूरतमंद परिजनों के सामने देवतुल्य साबित होते हैं। इसीलिए रक्तदान को महादान भी माना जाता है। भारत में रक्तदान को लेकर पिछले कुछ समय से जबर्दस्त जागरुकता का संचार हुआ है। राजसमंद जिला भी रक्तदान के मामले में पीछे नहीं है। यहां ऐसे काफी लोग हैं जो 40 या इससे अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं और अभी भी कर रहे हैं। दस से अधिक बार रक्तदान करने वालों की संख्या तो काफी है। इन सभी रक्तदाताओं का मकसद जरूरत के समय अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता बनाए रखना है। पिछले तीस वर्षों से जिले में शहर के साथ ही गांव व ढाणियों में रक्तदान की मुहिम चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार दक व बृजलाल कुमावत आदि ने सैकड़ों लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, मधुकर रक्त पेढ़ी, टीम जीवनदाता, अटल रक्त समूह, अखिल भारतीय तेरापंथी युवक परिषद, भारत स्काउट गाइड, महेश प्रगति संस्थान, एबीवीपी स्टूडेंट फॉर सेवा प्रकल्प, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई जैसी प्रेरणादायी संस्थानों से प्रेरित होकर इन दिनों तो कई युवा बढ़चढ़ कर रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं।

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