प्रयागराज, यूपी : संगम नगरी में सनातन आस्था के महापर्व महाकुंभ का दिव्य-भव्य आयोजन चल रहा है। सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वरों के साथ पूरे देश भर से साधु-संत और संन्यासी त्रिवेणी संगम के किनारे कल्पवास कर रहे हैं। 144 साल बाद पड़ने वाले इस विशेष महाकुंभ में कई बाबा विस्मय का केंद्र बने हुए हैं। रबड़ी बाबा, मौनी बाबा, बवंडर बाबा, गंगापुरी महाराज समेत कई साधु-संत अपने अनोखे अंदाज की वजह से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वहीं आईआईटी बाबा यानी अभय सिंह के बाद अब एक और बाबा काफी चर्चा बटोर रहे हैं। इनका नाम है संदीपानी महाराज। इनके जीवन और वैराग्य की कथा बड़ी ही रोचक है। स्वामी संदीपानी बताते हैं कि वे ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में phD कर चुके हैं। लॉ ग्रेजुएट भी हैं। कुछ समय इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र से जुड़ी एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब भी की है। लेकिन उनका जन्म वैरागी परिवार में हुआ। वैराग्य तो उनके डीएनए में ही था। पिछले 10 साल से वे वैरागी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि आपको इस संसार के दोनों पहलुओं का ज्ञान होना चाहिए- सांसारिक भी और वैराग्य भी। तभी आपका जीवन सार्थक होगा।
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