क्या घूंघट के पीछे अरमानों के 'कत्ल' की प्रथा? 78 साल की आजादी फिर भी पर्दे में कबसे 'आधी आबादी'?

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घूंघट की प्रथा सदियों से चली आ रही है. देश में आज भी एक बड़ा तबका है जो कही ख़ुशी से तो कही मज़बूरी से घूंघट ओढ़ने को बाध्य है. पहले ये समझते हैं कि घूंघट अचानक लाइमलाइट में आया क्यों है? तो आपको बता दें कि हाल ही में फेमस टीचर खान सर का रिसेप्शन हुआ था, जहां नामचीन लोग शिरकत करने पहुंचे. इस दौरान सबसे ज़्यादा जिस चीज़ ने सबका ध्यान आकर्षित किया वो था खान सर की वाइफ AS खान का घूंघट. इसे लेकर कई तरह की बातें होने लगीं, लोगों ने खान सर को ट्रोल करना शुरू कर दिया, जिसपर खान सर ने कहा कि वे ग्रामीण परिवेष से आते हैं और ये उनकी संस्कृति और परंपरा है तो उन्होंने इसे फॉलो किया.

अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या घूंघट प्राचीन भारतीय संस्कृति का हिस्सा था? तो आपको बता दें कि एक आर्टिकल के अनुसार भारत के प्राचीन मंदिरों में बनी देव-देवी या यक्ष की मूर्तियों में घूंघट नहीं दिखता. रामायण और महाभारत में भी सिर ढकने का जिक्र नहीं है जबकि महिलाएं प्राचीनकाल से साड़ी पहनती आ रही हैं लेकिन वह भी चेहरा नहीं ढ़कती थीं.

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~ED.276~HT.408~GR.124~

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