Arab NATO में Russia China अगर हुए शामिल तो US-Israel को होगा नुकसान, Qatar का खेल

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Arab NATO: अगर अरब नाटो का गठन होता है, तो यह किस तरह अमेरिका और इज़राइल के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। यह नया गठबंधन मिस्र, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों को एक साथ ला सकता है। इसका सबसे बड़ा हथियार है समान सुरक्षा का नियम, यानी अगर किसी सदस्य पर हमला होगा, तो पूरा गठबंधन एक साथ जवाब देगा। मिसाल के तौर पर, अगर इज़राइल गाजा या किसी अरब देश पर हमला करता है, तो अरब नाटो सीधे जवाब दे सकता है – मिसाइल हमले, सीमा पर सैन्य दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव। इस गठबंधन की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें शामिल देशों की संख्या, उनका सैन्य बल और संसाधन काफी बड़े पैमाने पर हैं। जाहिर सी बात है अगर अरब नाटो वजूद में आता है तो अमेरिका इसके खिलाफ जाएगा और ऐसे में अरब नाटों को हथियारों, ड्रोन, सैटेलाइट तकनीक के लिए दूसरे ऑपश्न तलाशने होंगे. ऐसे में उनके सामने अमेरिका का धुर विरोधी रूस और चीन हैं. अगर रूस और चीन का समर्थन भी अरब नाटो में जुड़ जाता है, तो यह अमेरिका और इजरायल के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। रूस हथियार, मिसाइल तकनीक और सैन्य प्रशिक्षण दे सकता है, जिससे अरब नाटो की ताकत बढ़ेगी। चीन आर्थिक निवेश और ऊर्जा सहयोग के जरिए इस गठबंधन का समर्थन कर सकता है। इससे अमेरिका और इज़राइल के लिए रणनीतिक चुनौती बढ़ जाएगी, क्योंकि उन्हें न केवल सैन्य स्तर पर बल्कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से भी मुकाबला करना होगा।

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