फतेहगढ़ साहिब केवल शहादत की भूमि नहीं, बल्कि करुणा और दया के अद्वितीय बलिदान की भी साक्षी है।
वीर बाल दिवस पर OneIndia की यह विशेष प्रस्तुति हमें बाबा मोती सिंह मेहरा जी की उस अमर कथा से रूबरू कराती है, जिन्होंने मानवता को इतिहास से भी ऊँचा कर दिया।
जब वज़ीर ख़ान के आदेश पर बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फ़तेह सिंह जी को ठंडे बुर्ज में कैद कर भोजन-पानी से वंचित किया गया, तब मोती सिंह मेहरा जी ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना चुपचाप उन्हें दूध पिलाया।
इस करुणा की कीमत उन्हें और उनके पूरे परिवार को अपने जीवन से चुकानी पड़ी।
आज भी गुरुद्वारा मोती सिंह मेहरा में रखे वे दो छोटे गिलास हमें याद दिलाते हैं कि वीरता केवल तलवार से नहीं, दया से भी जन्म लेती है।
वीर बाल दिवस पर ऐसे महान बलिदानों को शत-शत नमन।
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