हिण्डौनसिटी. मैं तो पूर्णिमा थी तेरे आंगन की सोन चिरैया बनती, पर तूने क्या किया? जन्म देने के बाद मां के दुलारने की बजाय कडकड़़ाती ठंड में मरने के लिए किसी दूसरे के घर के शौचालय में डाल दिया। पूरे 9 माह गर्भ में रख अपने खून से सींचा, उसी नन्ही सी जान को जन्म लेने के कुछ देर बाद यूं अपने आंचल से छिटका कर मरने को लिए छोड़ दिया। पौष माह की पूर्णिमा यानी शनिवार सुबह 10 डिग्री सेल्सियस तापमान में गलन भरी कड़ाके की सर्दी में शौचालय में पड़ी नवजात कन्या को देख हर किसी का दिल दहल गया। लेकिन रह रह कर सिसकने की मंद आवाज से लोगों का दिल पसीज गया और पुलिस बुला कर नवजात को तुरत फुरत जिला चिकित्सालय पहुंचाने उस मासूस को जीवन की किरण मिल गई।