30 मई 1996, दिल्ली की तिहाड़ जेल—जहां एक सांसद बंद है और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उसे हौसला देने के लिए ख़त लिखते हैं। यह कहानी है बृजभूषण शरण सिंह की, जिनके लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति में जननेता और बाहुबली के बीच की रेखा हमेशा धुंधली रही है। गोंडा–बलरामपुर की ज़मीन से उठकर छात्र राजनीति, दंगल, राम मंदिर आंदोलन, टाडा, तिहाड़ जेल, सत्ता, टकराव और बार-बार की राजनीतिक वापसी तक—यह सफ़र सिर्फ़ एक नेता का नहीं, बल्कि ताक़त, विवाद और प्रभाव की पूरी कहानी है। चार भाइयों की मौत, बचपन की हिंसा, गंभीर आरोप, मुकदमे और फिर भी छह बार सांसद बनना—क्या बृजभूषण शरण सिंह एक मज़बूत जननेता हैं या यूपी की राजनीति का सबसे चर्चित बाहुबली? पूरा वीडियो देखें और खुद फैसला करें।