'कश्मीर के मुद्दे को उलझाया नेहरू ने था और सुलझा सिर्फ मोदी जी सकते हैं’

Newslaundry 2021-11-10

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शिव शक्ति बक्शी पिछले आठ सालों से 'कमल संदेश' के कार्यकारी संपादक हैं. कमल संदेश भारतीय जनता पार्टी का मुखपत्र है जो हर पखवारे प्रकाशित होता है. शिव शक्ति के अनुसार कमल संदेश का सर्कुलेशन करीब 40 हजार है और यदि क्षेत्रीय संस्करणों को इसमें शामिल कर लिया जाए तो इसकी पाठक संख्या तकरीबन साढ़े सात लाख तक पहुंच जाती है.


इस साक्षात्कार में शिव शक्ति बता रहे हैं कि किसी राजनीतिक दल के मुखपत्र का संपादन करना किसी मुख्यधारा की पत्रिका के संपादन से कितना अलग है और कैसे कमल संदेश आम पाठकों की नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं की पत्रिका है.

कार्यकर्ताओं को समर्पित होने के बावजूद भी 'कमल संदेश' में कभी आम कार्यकर्ताओं को जगह क्यों नहीं दी जाती? इस सवाल के जवाब में शिव शक्ति का कहना था कि यह पत्रिका मुख्यतः कार्यकर्ताओं तक केंद्रीय नेतृत्व की बातें और नीतियां पहुंचाने का एक माध्यम है.

मुखपत्र का संपादक होने के चलते पार्टी नेताओं के हर बयान का और पार्टी या सरकार के हर फैसले का बचाव करना कितना मुश्किल होता है, मुखपत्र में स्वस्थ आलोचनाओं की कितनी गुंजाइश होती है और भाजपा में संगठन स्तर पर हुए बदलावों से पत्रिका में क्या बदलाव हुए हैं जैसे तमाम सवालों के जवाब भी शिव शक्ति ने इस साक्षात्कार में दिए हैं. इसके साथ ही कश्मीर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या भले ही नेहरू की देन है लेकिन इसे सुलझाने का काम मोदी जैसा व्यक्ति ही कर सकता है. नोटबंदी, जीएसटी और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाए जाने के फैसलों को शिव शक्ति ने अपने लेखों में 'ऐतिहासिक' बताया था. इस सम्बन्ध में उनसे पूछे गए तमाम सवालों पर उनके जवाब सुनने के लिए देखें पूरा साक्षात्कार.

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