ठंडे भोजन व पूजन से होते हैं शीत जनित रोग दूर

Bulletin 2021-04-04

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शाजापुर। समस्त देवियों में शीतलता की प्रतीक मां शीतला की पूजा अनादिकाल से महिलाओं द्वारा की जा रही है। मान्यता है कि माताजी जीवन में आवेश की अग्नि से बचाने में मदद कर शांति और शीतलता प्रदान करती है। भगवती शीतला की उपासना से स्वच्छता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रेरणा मिलती है। स्कंद पुराण में मां शीतला की अर्चना के लिए शीतलाष्टक का वर्णन है। होली के त्योहार के सातवें दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को माता शीतला की पूजा की जाती है। माता को बासा बना हुआ भोग लगाया जाता है। प्रसाद को परिवार के सभी लोग ग्रहण करते हैं। जब चेचक का प्रकोप बड़ी ही तेजी से फैलता है, तब इससे सुरक्षा व बचने के लिए मां शीतला की पूजन करते हैं। गांव के मध्य में शिव मंदिर के ठीक सामने शीतला माता का छोटा सा मंदिर हैं। बोलाई निवासी 50 वर्षीय कमलाबाई का कहना है सुख समृद्धि की कामना के लिए पूजन करते हैं। ठंडे पकवानों का भोग लगाकर यह संदेश देते हैं कि ग्रीष्म ऋतु में हल्का भोजन और शीतल पेय का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें।

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